ओजस्विनी महाविद्यालय में मनाया गया विश्व ओजोन दिवस.. संवाद न्यूज़ प्रबंधक विजय यादव

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दमोह…… ओजस्विनी महाविद्यालय में आज विश्वओजोन दिवस पर पोस्टर प्रतियोगिता ओजस्विनी महाविद्यालय द्वारा रखी गई जिसमें एकलव्य विश्वविद्यालय के छात्र एवं ओजस्विनी के छात्र सम्मिलित हुए , छात्र छात्राओं ने प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर भाग लिया, यह प्रतियोगिता 5 भागों में बांटी गई,ओजोन परत क्या है, ओजोन परत के लाभ, ओजोन परत मे होने वाली हानि, ओजोन परत में कमी होने से उसके प्रभाव, ओजोन परत को बचाने के तरीके, जिसमें छात्र-छात्राओं ने पोस्टर के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि ओजोन परत है तो हमहै अगर ओजोन परत का ध्यान ना रखा गया तो आने वाली पीढ़ियां रोग ग्रस्त होंगी,इस प्रतियोगिता के मुख्य जज, श्रीमती विशाखा शर्मा, श्रीमती निशा सोलंकी भरत राय एवं रितेश विश्वकर्मा रहे,
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एकलव्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ पवन कुमार जैन रहे, कुलपति महोदय ने ओजोन परत पर प्रकाश डालते हुए सभी छात्र छात्राओं को बताया कि प्रकृति के तमाम बेशकीमती तोफो में से एक है हमारी दुनिया के सिर पर तनी एक अदृश्य सुरक्षा चादर आसमानी बालाओं से बचाने वाली इस चादर को हम ओजोन लेयर भी कहते हैं तरक्की और सांसारिक सुविधाएं हासिल करने के चक्कर में हमने कब उस नीली छतरी में छेद कर डाला, पता ही नहीं चला,

कब आया मामला सामने………
……….. 1981 में पहली बार अंटार्टिका के ऊपरी वातावरण में ओजोन लेयर में होल होने की बात का पता चला इसके बाद से हर साल ओजोन लेयर में विश्व स्तर पर तीन परसेंट की छाती दर्ज की गई, 24 मिलियन वर्ग किलोमीटर हो गया जो नॉर्थ अमेरिका के बराबर था वैसे ओजोन क्षरण की समस्या तो सारी दुनिया में है लेकिन काफी ठंडे ध्रुवीय इलाकों में ओजोन लेयर में दिक्कत कुछ ज्यादा ही थी,

जब चौका नी हुई दुनिया

…………. ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल्स की रोकथाम के लिए 1987 में दुनिया भर के कई देशों ने एक समझौता किया जिसे मॉन्ट्रियल समझौते के तौर पर जाना जाता है फिलहाल 180 देश इस समझौते के प्रोटोकॉल में बंधे हुए हैं 1995 को यूनाइटेड नेशन में ओजोन के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल 16 सितंबर को वर्ल्ड ओजोन डे मनाने का फैसला किया.
बेहतर हुए हालात………
………..मॉन्ट्रियल समझौते और लोगों को जागरूक का नतीजा यह रहा कि पिछले 9 साल में ओजोन के स्तर में कोई कमी नहीं हुई अनुमान है कि 2050 तक ओजोन लेयर में आई कमी पूरी तरह ठीक हो जाएगी यहां तक कि आर्कटिक क्षेत्र में बना ओजोन होल पूरी तरह से भर जाएगा,

ऐसे ही बने नेचर के रक्षक………घर में पड़े पुराने फ्रिज और एसी एसी को जिम्मेदारी से डिस्पोज करें इन्हें कोबेचने से पहले से पहले सीएफसी कंप्रेसर अलग कर लें ध्यान रखें कि यह गैस वातावरण में सीधे लिक करें नई एयर कंडीशनर या रेफ्रिजरेटर आइटम खरीदे तो है इस बात का ध्यान रखें कि वह ओजोन फ्रेंडली हो, कई फॉर्म वाले मैट्ट्रेस तकिए वगैरह बनाने में ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है इनसे बचें और. अग्निशामक खरीदते वक्त ध्यान रखें कि उसमें ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाला केमिकल हैलोन ना हो खेती में बतौर कीटनाशक इस्तेमाल होने वाले मेथिल ब्रोमाइड पर रोक लगाते हुए इसके विकल्पों का इस्तेमाल करें,
ओजस्विनी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ शमा खानम ने बताया कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से सभी छात्र छात्राएं जागरूक होंगे एवं वह दूसरों को भी जागरूक करेंगे जिससे हमारा वातावरण प्रदूषित ना हो सके, और ओजोन विश्व दिवस 16 सितंबर को मनाया जाता है यह भी लोगों में एक संदेश जाए क्योंकि बहुत लोगों को यह मालूम नहीं है कि 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है, इस प्रतियोगिता में कुल 60 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और सभी छात्र छात्राओं को एकलव्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए, कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त डॉ मुकेश तिवारी ने किया और बताया कि ओजोन परत हमारे छत है जिस प्रकार हम अपने घर में रहते हैं और हमारे घर की छत हमारी रक्षा करती है उसी प्रकार ओजोन परत हमारे आसपास रहने वाले सभी जीव जंतुओं की रक्षा करती है इसलिए इसका ध्यान रखना हम सब का कर्तव्य है ,ओजस्विनी महाविद्यालय के सभी शिक्षक इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उपस्थित रहे, वनस्पति विभाग से पवन मोदी, खेल विभाग से श्री पहलाद राय, बायो टेक्नोलॉजी विभाग से मेघा श्रीवास्तव, मेहवार बख्श, डॉक्टर अंजलि तिवारी, चांदनी पटेल, पहलाद पटेल, प्रदीप नामदेव, राकेश चंदू भाई अमित चौरसिया प्रांजल, शगुफ्ता, गायत्री, पंकज सेन उपस्थिति रही,

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