औचित्य हीन साबित हुई देवतालाब मे करोड़ों की नाली,सड़क नदी मे तब्दील,यात्री परेशान
देवतालाब(प्रमोद सिंह सेंगर)- विन्ध्य के ऐतिहासिक र्तीथ पावन शिव नगरी मे श्रावण मेले की शुरुआत मे महज चंद दिनो का फासला बचा है परन्तु यहां र्तीथ यात्रियों की सुविधा के अनुरूप अभी तक किसी प्रकार की कोई तैयारी व व्यवस्था की सुगबुगाहट नहीं दिखाई पड़ रही है | इतना ही नहीं हाल ही में ग्रामपंचायत देवतालाब द्वारा बस स्टैंड से ले कर नईगढ़ी मार्ग मे दोनो ओर नाली का र्निमाण कराया गया जिससे उम्मीद लगाई जा रही थी कि नाली बनने के बाद देवतालाब मोड़(बस स्टैंड) से शिव मंदिर (नईगढ़ी)रोड पर जगह-जगह जमा होने वाले बरसाती व आम जन के निस्तार का पानी उक्त नाली के द्वारा व्यवस्थित हो जायेगा परन्तु पहली ही बारिस मे उक्त धारणाओं पर पानी भर गया और देवतालाब की सड़क मे बाढ़ जैसे हालत देखने को मिले | तो प्रश्न यह उठता है कि देवतालाब मे करोड़ों रुपए की लागत से किये गये नाली र्निमाण का औचित्य क्या रह गया | यहां महत्वपूर्ण यह नही है कि र्निमाण कार्य अच्छा है या नहीँ परन्तु यह बात अहम जरुर है कि करोड़ों रुपये के सरकारी पैसे से इस नाली के र्निमाण का आखिर मकसद क्या है, लोकतंत्र मे अपना कीमती वोट दे कर विकास का स्वप्न देखने वली जनता को आखिर यह जानने का अधिकार तो है ही, लेकिन सरपंच व सचिव द्वारा तो सब इंजीनियर के लेआउट व दिशा निर्देश पर काम तो कर दिया और निष्चित रुप से कहीं न कहीं,किसी न किसी का विकास तो हुआ ही होगा परन्तु क्या सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उक्त धनराशि का एक प्रतिशत भी सही उपयोग हुआ है या फिर केवल नजरी नक्शा भर ही दुरुस्त है.अब यह पता लगाना व सरकारी पैसे का जनता के हित मे सद उपयोग तय करना तो शत्ता के सहारे देवतालाब क्षेत्र के विकास के भागीरथी बन रहे उन तमाम जिम्मेदार लोगो का है जो सदैव प्रदेश के माननीय मंत्रियों से मिल कर देवतालाब के विकास की मांग करते रहते हैं | क्षेत्र की जनता अनवरत अपने सच्चे हितैषी व देवतालाब के विकास के भागीरथी को पलक पांवडे बिछाऐ निहार रही है |