


सरकारी उदासीनता के चलते खजुराहो के पर्यटन को लग रहा है पलीता- संवाद न्यूज डिप्टी हेड अनुपम गुप्ता की विशेष रिपोर्ट हमारी सरकारें(साशन) चाहे जो भी नियम कानून बना लें, जितना भी चिल्ला-चिल्ला कर हल्ला करके बताएं कि, हम देश में पर्यटन को ऊँचाइयों पर ले जाना चाहते हैं लेकिन इन ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए लगा प्रशासनिक तंत्र ही जब उदासीन हो, तब हमारे नियम कानून तथा योजनाएं धरी की धरी रह जाती हैं। देश के यशश्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की यह सोच कि हम अपनी धरोहरों को समझें, जाने एवं देश की पर्यटन को कैसे बढ़ावा मिले इसके लिए जागरूकता पैदा हो, शायद यही उद्देश्य रहा होगा सिटीवॉक फेस्टिवल का भी। मध्य प्रदेश के 11 शहरों में सिटीवॉक फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जो कि मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड यानी (एमपीटीबी) के द्वारा आयोजित हुआ, फिलहाल खजुराहो में यह पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। जिसके पीछे भी सरकारी तंत्र है, जिनकी योजनाएं और उदासीनता के कारण यह कार्यक्रम पूरी तरह फ्लॉप रहा। सिटीवॉक फेस्टिवल खजुराहो के अलावा मध्य प्रदेश के 10 अन्य शहरों में भी आयोजित हुआ। लगभग सभी जगह इस कार्यक्रम को लेकर प्रचार-प्रसार एवं जो उत्साह देखा गया वह खजुराहो में बिल्कुल भी नजर नहीं आया। खजुराहो पर्यटन के बढ़ावा को लेकर देखी गई यह उदासीनता स्थानीयजनों एवं पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए बड़ी ही चिंता का विषय बना हुआ है।। सिटीवॉक फेस्टिवल के लिए खजुराहो में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रभारी श्री लखन असाटी जी से जब फोन पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करना ही उचित नहीं समझा, क्योंकि वह स्वयं आज के इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं थे, इसके अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र का भी ढुलमुल रवैया देखकर खजुराहो की परिस्थितियों पर रोना आ रहा है। 3 नवंबर को खजुराहो एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री जी का आगमन है लेकिन सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार खजुराहो सिटीवॉक कार्यक्रम प्रभावित ना हो इसलिए कुछ अधिकारियों को इस ड्यूटी से भी अलग रखा गया। इसके बावजूद भी अधिकारियों का ना आना और इस कार्यक्रम के संदर्भ में जब पत्रकारों के द्वारा सवाल जवाब किए गए तो गोलमोल जवाब ढुलमुल रवैया रहा। कहीं बजट का रोना तो कहीं व्यस्तता और कुछ अधिकारियों ने तो जवाब देना ही उचित नहीं समझा। अब यह सब देख कर तो लगता है कि यह पर्यटन एवं अपने कर्तव्य के प्रति बेरुखी नहीं तो और क्या कहेंगे। सिटीवॉक फेस्टिवल में आज तो गजब ही हो गया इस कार्यक्रम के लिए निर्धारित गाइड श्री ओम प्रकाश पटेल ही मात्र वहाँ उपस्थित थे, इसके पूर्व आयोजित सिटीवॉक कार्यक्रम में भी कुछ गिने-चुने लोग ही पहुँचे, जो स्वयं गाइडों के द्वारा ही बुलाए गए थे। यदा-कदा कुछ सरकारी कर्मचारी व अधिकारी भी जबकि इस सिटीवॉक कार्यक्रम के लिए निर्धारित गाइड श्री अनुराग शुक्ला, अवधेश कौशिक एवं ओम प्रकाश पटेल जिन्होंने बड़ी ही उपयोगी एवं सारगर्भित तथ्यों को प्रस्तुत कर भले ही चंद लोग उपस्थित रहे लेकिन उपयोगी जानकारी प्रदान की। इस कार्यक्रम को लेकर प्रचार-प्रसार तो हम मानते हैं कि बिलकुल जीरो ही रहा, जबकि इस कार्यक्रम में ना सिर्फ पर्यटक बल्कि स्थानीयजनों को भी जोड़ना था, लेकिन किसी को किसी भी तरह से किसी भी माध्यम से सूचना ही नहीं संभवतः प्रदान की गई। जिसके चलते यह सिटीवॉक फेस्टिवल खजुराहो में तो पूरी तरह फ्लॉप रहा पिछली साल की अपेक्षाकृत, भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय हो या मध्य प्रदेश पर्यटन, पर्यटन बोर्ड या मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम इन सभी का कार्य पर्यटन को प्रमोट करना है, लेकिन खजुराहो को लेकर पर्यटन के लिए सभी नीति निर्धारक अधिकारी वा सरकारी अमला अगर निष्क्रिय है। तो यह खजुराहो के लिए बड़ी ही चिंता का सबब है, जिसको लेकर हमारे जनप्रतिनिधियों को आगे आना होगा एवं खजुराहो के विकास में बने, जो भी बाधक तत्व हों उन्हें हटाया जाना चाहिए। भारत सरकार के द्वारा विश्व धरोहर पखवाड़ा एवं पर्यटन दिवस पर भी यही बेरुखी देखने को मिल रही है, खजुराहो के पर्यटन को प्रभावित करने के लिए यह सभी कारक महत्वपूर्ण है, भले ही हम इन्हें छोटी-छोटी बातें कहकर टाल दें, लेकिन यही छोटी-छोटी बातें आज हमारे लिए पहाड़ जैसी दिख रही हैं। अगर हमने इन सभी को गंभीरता से लिया होता एवं खजुराहो के पर्यटन पर चिंता की होती तो आज यह स्थिति निर्मित ना होती। खजुराहो जो कि विश्व का एक अन्तराष्ट्रीय पर्यटन गाँव है। यहाँ दुनिया भर से सेलानी खिचे चले आते हैं, लेकिन धीरे-धीरे पर्यटको के आगमन में हुई गिरावट के कारण भी यही छोटी-छोटी बातें हैं। प्रशासनिक तंत्र बड़े ही आराम से गोलमोल बातें करके भले ही टाल दे, लेकिन खजुराहो का आमजन जो पर्यटन से जुड़ा हुआ है उसके लिए रोजी-रोटी का सवाल है। उनकी रोजी-रोटी पर इस तरह जो कुठाराघात प्रशासनिक तंत्र के द्वारा किया जा रहा है वह अक्षम्य अपराध की तरह ही देखा जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ और आने वाले समय में स्थितियाँ सही नहीं की गई तो, सिटीवॉक फेस्टिवल की तरह ही एक दिन खजुराहो भी फ्लॉप हो जाएगा।