श्रीमद भागवत पुराण कथा में श्रीकृष्ण रूक्मिणी विवाह में खूब थिरके भक्त अजयगढ से संवाद न्यूज ब्यूरो जयराम पाठक की रिपोर्ट

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अजयगढ़– अजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भापतपुर मुसाहब जू में 12 फरवरी से चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा एवं श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में छठवें दिन गुरुवार को राष्ट्रीय प्रवक्ता पं.श्री कमल नयन जी महाराज ने कंस वध कथा का वर्णन करते हुए नारद जी की अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारद जी के लिए लोककल्याण सर्वोपरि था, इसलिए नारद जी को देव-दानव और मानव सभी के यहां सम्मान मिलता था। उद्वव-गोपी प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि उद्वव ज्ञानी थे, तो गोपियां ब्रम्ह ज्ञानी थी। गोपियों की विरह वेदना का इतना सजीव बिम्ब प्रस्तुत किया कि लोगों की आंखों में आंसू झलझलाने लगे। गोपियां जहां कह रही है कि ‘मन न भए दस बीस’ तो वहीं भगवान श्री कृष्ण बृज को याद कर के कह रहे हैं कि ‘मोहि बृज बिसरत नाहि।’


श्रीराम कथा में रावण-कुम्भकर्ण के गुप्त संवाद का गीतावली के माध्यम से रहस्योद्घाटन करते हुए बताया कि राम का चरित्र इतना विराट और पवित्र है कि राम का रूप धारण करने मात्र से सारी सृष्टि की परनारी पुत्री,बहिन व माता रुप में दिखने लगती है। यही कारण था कि सीता हरण के समय रावण ने राम का रूप धारण नहीं किया।
श्रीकृष्ण-रूक्मिणी विवाह की कथा में श्री कृष्ण रूक्मिणी के जयमाला की सुन्दर झांकी प्रस्तुत सजायी गयी। तथा उपस्थित श्रृदालुओं ने परम ब्रह्म के पाणिग्रहण संस्कार में पैर पखार कर अपने को धन्य किया। तथा बाल, वृद्ध व युवा सभी वर्ग नर-नारी खूब थिरके।
प्रथम दिवस कार्यक्रम कलश यात्रा व बैठकी, द्वितीय दिवस श्रीकृष्ण जन्म कथा एवं तृतीय दिवस गोवर्धन पूजा की कथा वर्णन राष्ट्रीय प्रवक्ता पं.श्री कमलनयन महाराज जी द्वारा किया गया।मुसाहब जू परिवार के वंशज महेन्द्र प्रताप सिंह, सुरेन्द्र प्रताप सिंह, अरविन्द प्रताप सिंह तथा बृजेन्द्र प्रताप सिंह के सौजन्य से भापतपुर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा व श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। जिसमें सैकड़ों की संख्या में आस-पास के गांवों के लोग कथारस पान करने आ रहें हैं। प्रतिदिन कथा दोपहर एक बजे से शाम छः बजे होती है, लेकिन गुरुवार को शाम सात बजे कथा को विश्राम दिया गया।

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