धामपुर (बिजनौर)। नेशनल हाईवे 74 पर गांव मुबारकपुर कुंडा के पास बाइक सवार की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुई एक वृद्धा की सीएचसी पर इलाज के अभाव में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि वह घायल अवस्था में वृद्धा को लेकर सीएससी पहुंचे, लेकिन एक घंटे तक उन्हें उपचार नसीब नहीं हुआ। अगर समय रहते उसे इलाज मिल जाता तो मृतका की जान बच जाती। स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यप्रणाली को लेकर परिजनों में आक्रोश व्याप्त है।
शेरकोट थाना क्षेत्र के गांव मुबारकपुर निवासी विमला देवी 60 वर्ष पत्नी मानचंद गांव में परचून की दुकान से घरेलू सामान लेने के लिए घर से निकली। एनएच 74 पर बाइक सवार ने वृद्धा को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में वृद्धा और बाइक सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन घायलों को लेकर सीएचसी पहुंचे। इलाज के अभाव में काफी देर तक तड़प कर वृद्धा ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते सरकारी अस्पताल में घायल वृद्धा को इलाज मिल गया होता तो शायद उसकी जान बच जाती।
मृतका के पुत्र वेदपाल ने रोते बिलखते बताया कि वह काफी देर तक इलाज के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन कोई भी चिकित्सक या स्वास्थ्य कर्मी लगभग एक घंटे तक घायलों को इलाज देने के लिए नहीं पहुंचा।
परिजनों का आरोप है कि समय से इलाज नहीं मिलने के कारण ही उनकी मृत्यु हुई है। वृद्धा के पुत्र ने बताया मेरी मां के दाहिने हाथ बाएं पैर में चोट लगी थी, जिसकी लगभग एक घंटे के बाद कंमपोटर द्वारा पट्टी कराई गई और उसके बाद डॉक्टर ने आकर भी नहीं देखा।
उधर केंद्र अधीक्षक डा. ओपी यादव का कहना है कि हमने तुरंत घायल को प्राथमिक इलाज देकर रेफर कर दिया था। यह लोग अपने मरीज को यहां से जिला अस्पताल लेकर नहीं ले गए। इसमें हमारी कोई गलती नहीं है।


